Sunday 30 November 2008

शोक नहीं आक्रोश जताओ

---- चुटकी----

शोक नही
आक्रोश जताओ,
नेताओं को
ओकात बताओ,
घर में बैठे
कुछ ना होगा,
पाक में जा
कोहराम मचाओ,
बहुत सह लिया
अब ना सहेंगें
भारत माँ की
लाज बचाओ।

Saturday 29 November 2008

बहादुरों को सलाम,शहीदों को नमन

देश भर में जब मुंबई काण्ड पर राजनेता राजनीति कर रहें हैं वहीँ भारत-पाक सीमा से सटे श्रीगंगानगर में जागरूक लोगों ने अपने अंदाज में सुरक्षा बलों के बहादुरों को सलाम कर शहीदों को नमन किया। बिना किसी तामझाम के नगर के गणमान्य नागरिकों ने मौन शान्ति मार्च निकाला। इन नागरिकों ने अपने गलों में आतंकवाद के खिलाफ और देश में अमन चैन बनाये रखने की अपील करते पोस्टर लटका रखे थे। महात्मा गाँधी चौक पर इन लोगों ने " भारत माता की जय" "आतंकवाद मुर्दाबाद " के नारे लगाये और मोमबत्ती जलाकर शहीदों को नमन किया। बेशक शान्ति मार्च में शामिल लोगों की संख्या कम थी मगर उनका मकसद बहुत बढ़ा था। इस मार्च में श्रीराम तलवार, विजय अरोडा,अशोक नागपाल,निर्मल जैन,तेजेंदर पाल तिम्मा,मुकेश कुमार, निर्मल जैन,नरेश शर्मा,दर्शन कसेरा आदि प्रमुख लोग थे।

अहिंसा परमो धर्म है


गाँधी जी के पदचिन्हों
पर चल प्यारे,
दूसरा गाल भी
पाक के आगे कर प्यारे।
---
अहिंसा परमो धर्म है
रटना तू प्यारे,
एक तमाचा और
जरदारी जब मारे।
----
ये बटेर हाथ में तेरे
फ़िर नहीं आनी है,
लगे हाथ तू
देश का सौदा कर प्यारे।

ज़िन्दगी मेरे नाम से घबराती क्यूँ है

ऐ ज़िन्दगी तू मेरे नाम से घबराती क्यूँ है
आके दरवाजे पे मेरे लौट जाती क्यूँ है
मैं भी एक इन्सान हूँ तुम्हारी इस दुनिया का
फ़िर तू मुझसे अपना दामन बचाती क्यूँ है।
ऐ ज़िन्दगी तू.........................
दो घड़ी पास बैठो पूछो हाल हमसे भी
ना जाने तू मेरी सूरत से डर जाती क्यूँ है
सताता है मुझे हर रोज हर इन्सान दुनिया का
तू भी इतनी बेरुखी से कहर ढाती क्यूँ है
ऐ ज़िन्दगी....................
जो दुश्मन हैं बाग़ की हर खिलती हुई कली के
वहां जाकर तू अपनी खुश्बू फैलाती क्यूँ है
हर वक्त सामने रहे तेरी सूरत मेरी आंखों के
उसके बीच में तू अपना दामन लाती क्यूँ है।
ऐ ज़िन्दगी तू .........................

Friday 28 November 2008

आडवानी जी आए पर भाए नहीं

श्रीगंगानगर जिले के एक कस्बे में आज लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवानी ने एक सभा को संबोधित किया। बीजेपी उम्मीदवार वर्तमान सांसद निहाल चंद के पक्ष में हुई इस सभा में उन्होंने एन डी ऐ सरकार की खूब तारीफ की। विकास के नाम पर वोट मांगे। आतंकवाद पर भी बोले। लेकिन वैसा नही जैसा लोग सुनना चाहते हैं। लोग तो वह सुनना पसंद करते हैं जो नरेंद्र मोदी बोलते हैं। उनकी सभा से निहाल चंद को कितने वोट मिलेंगें यह ८ तारीख को पता लगेगा। श्री आडवानी की सभा के लिए सुरक्षा क्या थी उसकी एक बानगी बतातें हैं। उनकी सभा के लिए प्रेस के पास एक बीजेपी कार्यकर्त्ता की जेब में थे। वह भी खाली। ना तो उस पर यह लिखा था कि ये पास किसने किस हैसियत से जारी किए हैं। पास के पीछे काम के बोझ के मारे वहां के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने ऐसे किए जैसे स्कूल में मास्टर करते हैं। ना कोई मोहर ना नाम,ना कोई पोस्ट का जिक्र। पास पर ख़ुद नाम लिखो और साहब से हस्ताक्षर करवा लो। यह हाल तो तब है जब मुंबई में आतंकवादियों से सेना लोहा ले रही है। जब कोई घटना हो जाती है तो फ़िर बलि का बकरा तलाश किया जाता है। समझ नहीं आता कि पुलिस के अधिकारी यह सब जानते नहीं या वे जिम्मेदारी से काम नही करना चाहते। बॉर्डर के साथ लगते इस जिले का तो भगवान ही मालिक है। ये तो उसी की कृपा है की सब ठीक से निपट जाता है।

जरा बाहर तो आओ

एक आदमी अपनी पत्नी पर चिल्ला रहा था। बस, बहुत हो गया, अब मैं सहन करने वाला नहीं हूँ। तुमने समझ क्या रखा है अपने आप को। मैं अब तुम्हारी हर बात का सख्ती से जवाब दूंगा। मैं तो तुमको कमजोर समझ कर चुप था वरना अभी तक तो कभी का सीधा कर दिया होता। साहब काफी देर तक इसी प्रकार बोलते रहे, धमकाते रहे। फ़िर उनकी पत्नी की आवाज आई, अरे इतने बहादुर हो तो पहले डबल बेड के नीचे से तो निकालो वहां क्यों छिपे हो। पत्नी के हाथ में उसका हथियार था।
क्या हमको ऐसा नही लगता कि हमारी सरकार भी डबल बेड के नीचे से आतंकवादियों को धमका रही है। वे जब चाहें जहाँ कुछ भी कर देतें हैं और हमारे नेता सिवाए बयानों के कुछ नहीं करते।
---- चुटकी---

बिना आँख और
बिना कान
वाली सरकार,
तुझको हमारा
बार बार नमस्कार।

Thursday 27 November 2008

कब तक सोये रहोगे, अब जाग जाओ

कभी अजमेर, कभी दिल्ली ,कभी जयपुर और अब मुंबई आतंक के साये में। घंटों चली मुठभेड़,प्रमुख अफसर मरे,विदेशी मरे, आम आदमी मरा। और हम हैं कि सो रहें हैं। देश में सांप्रदायिक सदभाव कम करने की कोशिश लगातार की जा रहीं हैं। आतंकवाद हमारी अर्थव्यवस्था को नेस्तनाबूद करने जा रहा है। हम घरों में बैठे अफ़सोस पर अफ़सोस जता रहें हैं। हमारी सरकार कुछ नहीं कर रही। नेता हिंदू मुस्लिम का नाम लेकर असली आतंकवाद को अनदेखा कर रहें हैं। इस देश में कोई ऐसा नहीं है जो उनसे इस बात का जवाब मांग सके कि यह सब क्यों और कब तक? पहली बार कोई यहाँ खेलनी आई विदेशी टीम दौरा अधुरा छोड़ कर वापिस जा रही है। शेयर बाज़ार बंद रखा गया। देश के कई महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव हो रहें हैं। अगले साल लोकसभा के चुनाव होने हैं। राजनीतिक दल एक दुसरे पर प्रहार कर रहें हैं। आतंकवाद चुनावी मुद्दा है,जिसके सहारे सब अपना वोट बैंक बढ़ाने में लगें हैं। इस मुद्दे पर बोलते तो सभी हैं लेकिन कोई भी करता कुछ नहीं। अगर हम सब इसी प्रकार सोते रहें तो आतंकवादियों के हौंसले बुलंद ही बुलंद होते चले जायेंगें। इसलिए बहुत हो चुका, बहुत सह चुके इस आतंकवाद को,अब हमें एक जुट होकर लडाई लड़नी होगी। शब्दों से नहीं उन्ही की तरह हथियारों से।कब तक सोते रहोगे अब तो जाग जाओ।
----स्वाति अग्रवाल

सरकार हमारी गांधीवादी

--- चुटकी----

मानवता डर गई
नैतिकता मर गई
बहुत मुश्किल घड़ी है,
सरकार हमारी
पक्की गाँधीवादी
हाथ बांधे खड़ी है।

---- गोविन्द गोयल

मिली क्यों,मिली तो बिछड़ी क्यों

सुना है,पढ़ा है और किसी
सयाने ने बताया भी था कि
भाग्य में जो है वह मिलेगा
तुम मिलीं, मिलकर बिछड़ गईं
सवाल ये कि
तुम मेरे भाग्य में थीं
तो बिछड़ क्यों गईं
अगर भाग्य में नहीं थीं तो
तुम मिलीं कैसे
अगर दोनों बात भाग्य के साथ है
तो फ़िर ये बिल्कुल साफ है कि
भाग्य बदलता है
इसलिए तुम उदास मत होना
अपना मिलन फ़िर हो सकता है।

Wednesday 26 November 2008

एक छोटी सी नाव

पानी का एक अनंत समंदर
उसमे उमड़ रहा भयंकर तूफान
आकाश से मिलने को आतुर
ऊपर ऊपर उठती लहरें
ऐसे मंजर को देख
बड़े बड़े जहाजों के कप्तान
हताश होकर एक बार तो
किनारे की आश छोड़ दें,
मगर एक छोटी सी नाव
इस भयंकर तूफान में
इधर उधर हिचकोले खाती हुई
किस्मत की लकीरों को मिटाती हुई
यह सोच रही है कि
कभी ना कभी तो
मुझे किनारा नसीब होगा
या बीच रस्ते में ही इस
समंदर की अथाह गहराइयों में
खो जाउंगी सदा के लिए।
नाव की कहानी मेरे जैसी है
वह समुंदरी तूफान में
किनारे की आस में है
चली जा रही हैं,
और मैं जिंदगी के तूफान में
जिंदगी की आस में
जिए जा रहा हूँ।

Monday 24 November 2008

नेता और अभिनेता

---- चुटकी----

जो जितना
बड़ा नेता,
वह उतना
बड़ा अभिनेता।
----
जन जन के सामने
करता है विनय,
यही तो है उसका
सबसे बड़ा अभिनय।

---गोविन्द गोयल

सूरत तक भूल जायेंगें

---- चुटकी----

आज जो नेता आपको
अपना सबसे खास
आदमी बतायेंगें,
चुनाव जीतने के बाद
वही नेता जी आपकी
सूरत तक भूल जायेंगें।

--- गोविन्द गोयल

Sunday 23 November 2008

चौंक चौंक उठता है आलम मेरी तन्हाई का
यूँ अचानक वो हर बात पे याद आतें हैं।
----
दास्ताने इश्क में कुछ भी हकीकत हो तो फ़िर
एक अफ़साने के बन जाते हैं अफ़साने बहुत।
----
आज दुनिया में वो ख़ुद अफसाना बन के रह गए
कल सुना करते थे जो दुनिया के अफ़साने बहुत।
---
पीते पीते जब भी आया तेरी आंखों का ख्याल
मैंने अपने हाथों से तोडे हैं पैमाने बहुत।
----
नहीं मालूम अब क्या चीज आंखों में रही बाकी
नजर तो उनके हुस्न पे जाकर जम गई अपनी।
----
उन आंखों में भी अश्क भर्रा गए हैं
हम जो bhule से उनको याद आ गए हैं
---
खिजां अब नहीं आ सकेगी चमन me
baharon से कह दो की हम आ गए हैं।

----सब कुछ संकलित है

मैं देरी से नहीं उठा

ना, मैं देरी से नहीं उठा
वक्त ने मुझे हमेशा की तरह
सूरज की पहली किरण से भी पहले
आकर जगा दिया था,
और मैं उठ भी गया था
मगर मैंने इंसानियत को
जब सोते हुए देखा,
पीड़ित,बेबस,लाचार,गरीब इंसानों को
अपने अपने दर्द से रोते बिलखते देखा,
नगर के इंसानों के परिवारों के
घरों को उजड़ते देखा
तो मैं जाग नहीं सका
मुझे गहरी नींद आ गई,
क्योंकि जब तक इंसानियत
नहीं जागती, मेरे जैसा अकेला
इंसान जग कर क्या करता
और इसलिए मैं सो गया
अपना मुहं ढांप कर
सदा के लिए, सदा के लिए।

Friday 21 November 2008

श्रीगंगानगर--बीजेपी बचाव की मुद्रा में

श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में विधानसभा की ११ सीट हैं। गत चुनाव में बीजेपी ने सात,कांग्रेस,लोकदल[चौटाला] ने एक एक सीट जीती। दो निर्दलीय भी विजयी हुए थे। इस बार देखते हैं कि कहाँ क्या हो सकता है।
श्रीगंगानगर- यहाँ से कांग्रेस के राज कुमारगौड़,बीजेपी के राधेश्याम गंगानगर मुख्य उम्मीदवार हैं। गजेंद्र सिंह भाटी बीजेपी का बागी है। बीएसपी का सत्यवान है। इनके अलावा 9 उम्मीदवार और हैं। जिनके नाम हैं-ईश्वर चंद अग्रवाल,केवल मदान,पूर्ण राम, भजन लाल, मनिन्द्र सिंह मान, राजेश भारत,संजय ,सत्य पाल और सुभाष चन्द्र। बीजेपी के राधेश्याम गंगानगर गत चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर ३६००० वोट सर हारे। उन्होंने कुछ दिन पहले ही बीजेपी का दामन थामा और बीजेपी ने टिकट उनको थमा दी। बस यह बात जन जन को हजम नहीं हो रही। जिसको जनता ने ३६०० मतों से हराया वह चौला बदल कर फ़िर सामने है। जिस कारण राजकुमार गौड़ भारी पड़ रहें हैं। बीजेपी के दिमाग में यह बात फिट करदी कि श्रीगंगानगर से केवल अरोडा बिरादरी का उम्मीदवार ही चुनाव जीत सकता है। राधेश्याम गंगानगर इसी बिरादरी से है। जैसे ही कांग्रेस ने इनको नकारा बीजेपी ने लपक लिया। मगर ये बात याद नही आई कि इसी अरोडा बिरादरी के राधेश्याम गंगानगर ने सात चुनाव में से केवल तीन चुनाव ही जीते। जो जीते वह कम अन्तर से जो हारे वह भारी अन्तर से। बीजेपी कार्यकर्त्ता क्या आम वोटर को राधेश्याम का चौला बदलना हजम नहीं हो रहा। राधेश्याम अभी तक बीजेपी के नेताओं को अपने पक्ष में नहीं कर पाए। एक को मना भी नहीं पाते कि दूसरा कोप भवन में चला जाता है। सब जानते हैं कि राधेश्याम गंगानगर ने कांग्रेस में किसी को आगे नहीं आने दिया, इसलिए अगर यह बीजेपी में जम गया तो उनका भविस्य बिगड़ जाएगा। लोग सट्टा बाजार और अखबारों में छपी ख़बरों की बात करतें हैं। लेकिन इनका भरोसा करना अपने आप को विचलित करना है। १९९३ में सट्टा बाजार और सभी अखबार श्रीगंगानगर से बीजेपी के दिग्गज नेता भैरों सिंह शेखावत की जीत डंके की चोट पर दिखा रहे थे। सब जानतें हैं कि तब श्री शेखावत तीसरे स्थान पर रहे थे।

Thursday 20 November 2008

हाँ, वह तुम ही तो थी


हाँ वह तुम ही तो थी, उस रोज
मेरे साथ मेरे घर के आँगन में
तुम्ही ने तो मेरा हाथ पकड़ कर
इन तूफानों से निकल जाने की
क़समें खाई थी,
मगर ये क्या,आज तुम कह रही हो
अब और ना चल सकुंगी
मैं तुम्हारे साथ इन तूफानों में,
मगर क्यों,
क्या अब तुम्हे डर लगने लगा है
या किसी नाव के साथ मल्लाह मिल गया है
जो तुम्हे अपने सीने से लगा
बिना किसी डर के तुफानो से
सुरक्षित निकाल कर
किनारे पर पहुँचा देगा,
ठीक है, तुम जाओ
अपने उस मल्लाह के साथ
खुदा तुम्हारे तूफानों को भी
मेरे रास्ते में डाल दे
और तुम पहुँच जाओ
अपने साथी के साथ बे खौफ
अपनी मंजिल पर
और मैं अकेला देखता रहूँ
तुम्हे उस पार जाते हुए।

---गोविन्द गोयल

कांग्रेस ने थूका,बीजेपी ने चाटा

श्रीगंगानगर में कांग्रेस के दिग्गज नेता हुए राधेश्याम गंगानगर। उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर विधानसभा के सात चुनाव लड़े। तीन जीते, चार हारे। जो हारे शानदार तरीके से। नेता जी कांग्रेस को अपनी माँ कहते। इस बार कांग्रेस ने नेता जी को अपना उम्मीदवार नहीं बनाया। नेता जी उम्मीदवारी के बिना रहा नहीं सकते थे। सीधे गए बीजेपी की चौखट पर। आज वे श्रीगंगानगर से बीजेपी के उम्मीदवार हैं। बीजेपी जो अपने आप को बड़ी आदर्शवादी, अनुशासित,नीतियों वाली पार्टी बताती है। उसने एक ऐसे नेता को अपना उम्मीदवार बना दिया जो एक सप्ताह पहले तक उसको गाली निकलता था। इस नेता को भारत माता की प्रतिमा के हाथ में वन्देमातरम वाले भगवा झंडे से भी एतराज था। आज यह नेता ख़ुद भगवे में लिपटा हुआ है। मजेदार बात ये कि जो बीजेपी नेता गत चुनाव में इसके प्रति जहर उगला करते थे वे अब राधेश्याम जी के चरणों में लोट पोट होकर अपने आप को धन्य समझ रहें हैं। सिद्धान्त,नीतियां,आदर्श सब के सब हवा हो गए। जिस नेता को जनता ने गत चुनाव में ३६००० वोटों से नकार दिया था वह इस बार चोला बदल कर जनता के बीच आ गया। बीजेपी की टिकट के दावेदार मुहं ताकते रह गए। बीजेपी के नेताओं की तो मज़बूरी हो सकती है लेकिन कार्यकर्त्ता तो मजबूर नहीं। राधेश्याम गंगानगर ने यहाँ जातिवाद का जहर घोला। अब उसको ३६ बिरादरी याद आ रहीं हैं। पता नहीं इसशहर का क्या होगा।

Tuesday 18 November 2008

वजूद ही ख़त्म हो जाए

मैं जानता था कि मेरे चारों ओर
स्वार्थी व मौका परस्त लोगों का जमघट है
मुझ ये भी मालूम था कि
ये सब अपने स्वार्थ के लिए
मेरे खून का कतरा कतरा
पीने से भी नहीं हिचकिचायेंगें
मगर मैंने ये नहीं सोचा था कि
यह सब इतनी जल्दी हो जाएगा
मुझे बिस्तर पर पड़ा देख
ये लोग यह सोचते हुए
मुझसे दूर चले जायेंगें कि
इसमे अब खून रहा ही कहाँ है
जो हमें पीने को मिलेगा
और मैं अकेला बिस्तर पर पड़ा
अपनी टूटी फूटी छत को घूरने लगा
यह सोचते हुए कि कहीं
यह उन लोगो की तरह
साथ छोड़ने के स्थान पर मुझे
अपने आँचल में सदा के लिए
ना छिपा ले
जिससे कि मेरा रहा सहा
वजूद ही ख़त्म हो जाए।

---गोविन्द गोयल

कुर्सी ही है ईमान

---- चुटकी-----

कुर्सी पार्टी
कुर्सी निष्ठा
और कुर्सी
ही है ईमान,
अपने नेता का
सच यही है
तू मान
या ना मान।

----गोविन्द गोयल

Monday 17 November 2008

जनता का उम्मीदवार कुन्नर

जब राजनीतिक दलों के नेता बिना समझे टिकट की बन्दर बाँट करतें हैं तो जनता को सामने आना पड़ता है। ऐसा ही कुछ हुआ श्रीगंगानगर जिले के श्री करनपुर में , यहाँ एक नेता हैं गुरमीत सिंह कुन्नर। इनको पार्टी ने टिकट नहीं दिया, नहीं दिया तो नहीं दिया। कुन्नर ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया। बस उसके बाद इलाके की जनता कुन्नर के यहाँ पहुँच गई। कोई सौ दो सौ नहीं। कई हजार। श्री कुन्नर ने चुनाव ना लड़ने की बात कही। लेकिन जनता कुछ भी सुनाने को तैयार नहीं हुई। आख़िर श्री कुन्नर को यह कहना पड़ा, जो आपकी इच्छा हो, मैं आपके साथ हूँ। लो साहब, इलाके में जनता का उम्मीदवार बन गया कुन्नर। कांग्रेस और बीजेपी की टिकट पाने वाले जनता को तरस गए और श्री कुन्नर के यहाँ अपने आप कई हजार लोग आ पहुंचे। इस भीड़ ने कुन्नर का पर्चा दाखिल करवाया। भीड़ ने कुन्नर को भरोसा दिलाया है कि वे उनके लिए दिन रात एक कर देंगे। हिंदुस्तान में बहुत कम जगह ऐसा होता होगा जब जनता किसी को जबरदस्ती चुनाव लड़ने को मजबूर करती है। जब जन जन साथ हो तो फ़िर विजय कैसे दूर रह सकती है।

बे पैंदे के लौटे

---- चुटकी ----

नेता, छोटे
हो या मोटे,
सब के सब हैं
बे पैंदे के लौटे।
-----
नेता, छोटे
हो या बड़े,
सब होतें हैं
चिकने घड़े।

--- गोविन्द गोयल

Sunday 16 November 2008

गिरगिट समाज के लिए संकट

श्रीगंगानगर की सड़कों पर बहुत ही अलग नजारा था। चारों तरफ़ जिधर देखो उधर गिरगिटों के झुंड के झुंड दिखाई दे रहे थे। गिरगिट के ये झुंड नारेलगा रहे थे " नेताओं को समझाओ, गिरगिट बचाओ", "गिरगिटों के दुश्मन नेता मुर्दाबाद", " रंग बदलने वाले नेता हाय हाय"," गिरगिट समाज का अपमान नही सहेगा हिंदुस्तान"। ये नजारा देख एक बार तो जो जहाँ था वही रुक गया। ट्रैफिक पुलिस को उनके कारन काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। गिरगिटों के ये सभी झुंड जा रहे थे राम लीला मैदान। वहां गिरगिट बचाओ मंच ने सभा का आयोजन किया था। रामलीला मैदान का नजारा, वह क्या कहने। लो जी सभा शुरू हो गई। जवान गिरगिट का नाम पुकारा गया। उसने कहा- यहाँ सभा करना कायरों का काम है। हमें तो उस नेता के घर के सामने प्रदर्शन करना चाहिए जिसने रंग बदल कर हमारी जात को गाली दी है। बस फ़िर क्या था सभा में सही है, सही है, के नारों के साथ जवान गिरगिट खड़े हो गए। एक बुजुर्ग गिरगिट ने उनको समझा कर शांत किया।
गिरगिट समाज के मुखिया ने कहा, इन नेताओं ने हमें बदनाम कर दिया। ये लोग इतनी जल्दी रंग बदलते हैं कि हम लोगों को शर्म आने लगती है। जब भी कोई नेता रंग बदलता है , ये कहा जाता है कि देखो गिरगिट कि तरह रंग बदल लिया। हम पूछतें हैं कि नेता के साथ हमारा नाम क्यों जोड़ा जाता है। नेता लोग तो इतनी जल्दी रंग बदलते हैं कि गिरगिट समाज अचरज में पड़ जाता है। मुखिया ने कहा, हम ये साफ कर देना चाहतें है कि नेता को रंग बदलना हमने नहीं सिखाया। उल्टा हमारे घर कि महिला अपने बच्चों को ये कहती है कि -मुर्ख देख फलां नेता ने गिरगिट ना होते हुए भी कितनी जल्दी रंग बदल लिया, और तूं गिरगिट होकर ऐसा नहीं कर सकता,लानत है तुझ पर ... इतना कहने के बाद तडाक और बच्चे के रोने की आवाज आती है।मुखिया ने कहा हमारे बच्चे हमें आँख दिखातें हैं कहतें हैं तुमको रंग बदलना आता कहाँ है जो हमको सिखाओगे, किसी नेता के फार्म हाउस या बगीचे में होते तो हम पता नहीं कहाँ के कहाँ पहुँच चुके होते। मुखिया ने कहा बस अब बहुत हो चुका, हमारी सहनशक्ति समाप्त होने को है। अगर ऐसे नेताओं को सबक नहीं सिखाया गया तो लोग "गिरगिट की तरह रंग बदलना" मुहावरे को भूल जायेंगे।
लम्बी बहस के बाद सभा में गिरगिटों ने प्रस्ताव पास किया। इस प्रस्ताव में सभी दलों के संचालकों से कहा गया कि अगर उन्होंने रंग बदलने वाले नेता को महत्व दिया तो गिरगिट समाज के पाँच जीव हर रोज उनके घर के सामने नारे बाजी करेंगे। मुन्ना गिरी से उनको समझायेंगे। इन पर असर नही हुआ तो सरकार से "गिरगिट की तरह रंग बदलना" मुहावरे को किताबों से हटाने के लिए आन्दोलन चलाया जाएगा। ताकि ये लिखवाया जा सके "नेता की तरह रंग बदलना"। सभा के बाद सभी गिरगिट जोश खरोश के साथ वापिस लौट गए।

Saturday 15 November 2008

बीजेपी के पास है क्या ? आयातित नेता

श्रीगंगानगर में बीजेपी ऐसा दल है जिसके पास ना तो कोई अनुशासन है और न नेता। जिसके जो जी में है आता है कर लेता है। ऐसा ही हाल जयपुर दिल्ली बैठे इनके बड़े बड़े नेताओं का है। श्रीगंगानगर से लेकर जयपुर दिल्ली तक में कोई ऐसा नहीं जो यह कह सके कि उसने श्रीगंगानगर में बीजेपी को नेता दिया है। यहाँ जो भी नेता चुनाव लड़ने के लिए आया वह या तो बीजेपी का नहीं था या शहर का नही था। १९९३ में बीजेपी के दिग्गज नेता भैरों सिंह शेखावत ने विधानसभा का चुनाव लड़ा। सब जानते हैं कि वे श्रीगंगानगर के वोटर तक नहीं है। १९९८ में महेश पेडिवाल मैदान में थे। वे जनता दल से आए। ऐसा ही २००३ में हुआ, जब जनता दल से बीजेपी में आए सुरेन्द्र राठौर ने बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। ऐसा ही हाल अब २००८ में होता दिख रहा है। सारी उमर बीजेपी को कोसने वाले काग्रेस की टिकट पर ७ बार चुनाव लड़नेवाले राधेश्याम गंगानगर को मैदान में उतारने की तैयारी है। मतलब कि असली बीजेपी नेता या कार्यकर्त्ता नहीं। जनसंघ या आर आर एस वाला तो कोई आज तक आया ही नही। थोड़ा और आगे चलें, यहाँ जो चाहे बीजेपी कार्यकर्ताओं की बैठक बुला लेता है। कई दिन पहले नगर मंडल श्रीगंगानगर ने बीजेपी कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई। अब गजेन्द्र सिंह भाटी ऐसा कर रहें हैं। नगर मंडल के अध्यक्ष हनुमान गोयल का कहना है कि उन्होंने कोई बैठक नहीं बुलाई। है ना हैरानी की बात। वैसे गजेन्द्र सिंह भाटी बीजेपी महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष रितु गजेन्द्र भाटी के पति हैं। ख़ुद श्री भाटी के पास कोई पोस्ट नहीं है। उनका कहना है कि कोई भी कार्यकर्त्ता इस प्रकार की बैठक बुला सकता है। इसे कहते हैं अनुशासन।

चाँद पर पहुँच गया भारत

----चुटकी----

बीजेपी- कांग्रेस में
लग रहें हैं
टिकटों के दाम,
इसका मतलब
भारत सचमुच
चाँद पर
पहुँच गया श्रीमान।

---गोविन्द गोयल

Friday 14 November 2008

कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है

ये ठीक है कि कुछ पाने के लिए
कुछ ना कुछ खोना पड़ता है,
लेकिन मैं इस बात से अंजान था कि
मैं कुछ पाने के लिए
इतना कुछ खोता चला जाउंगा
कि मेरे पास कुछ और
पाने के लिए
कुछ भी नहीं बचेगा,
और मैं और थोड़ा सा कुछ
पाने के लिए
अपना सब कुछ खोकर
उनके चेहरों को पढता हूँ ,
जो मेरे सामने
कुछ पाने की आस में आए ,
मैं उनको कुछ देने की बजाये
अपनी शर्मसार पलकों को झुका,
उनके सामने से एक ओर चला जाता हूँ
किसी ओर से कुछ पाने के लिए।

Thursday 13 November 2008

कभी श्याम बन के कभी राम बन के

श्रीगंगानगर के दिग्गज कांग्रेसी नेता राधेश्याम पार्टी ले टिकट नही मिलने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए। यह सब लिखा है " तिरंगे नेता की दुरंगी चाल में" आज कई लोग मिले और कहा कि कुछ हो जाए, तो जनाब उनका सुझाव सर माथे।
नेता जी का नाम है राधेश्याम और ये बीजेपी में शामिल हुए हैं। तो कहना पड़ेगा---
कभी श्याम बन के
कभी "राम" बन के
चले आना, ओ राधे चले आना।
कभी तीन रंग में आना
कभी दुरंगी चाल सजाना
ओ राधे चले आना।
अब राधेश्याम का नाम बदल कर राधेराम कर दिया गया है। ताकि सनद रहे और वक्त जरुरत काम आए। श्रीगंगानगर इलाके में राधेश्याम के राधेराम में बदल जाने की बात लोगों को हजम नही हो रही। क्योंकि यह आदमी कांग्रेस को अपनी माँ कहता था।

नैनो का का सारा काजल

साजन जैसे हरजाई हैं
सावन के काले बादल
रो रो कर बिखर गया
नैनो का सारा काजल।
----
यादों की तरह छा जातें हैं
मानसून के मेघ
काँटों जैसी लगती है
हाय फूलों की सेज।
----
हिवडा मेरा झुलस रहा
ना जावे दिल से याद
सब कुछ मिटने वाला है
जो नहीं सुनी फरियाद।

Wednesday 12 November 2008

तिरंगे नेता की दुरंगी चाल

लगभग चालीस साल पहले की बात है श्रीगंगानगर में राधेश्याम नाम का एक आदमी था। बिल्कुल एक आम आदमी जो पाकिस्तान से आया था। उसने मेहनत की, आगे बढ़ा,थोड़ा जयादा आगे बढ़ा,राजनीति में आ गया। नगरपालिका का चेयरमेन बना। नगर में पहचान बनी,रुतबा हुआ। तकदीर ने साथ दिया दो पैसे भी पल्ले हो गए। उसके बाद इस आदमी ने पीछे मुड़कर देखा ही नही। कांग्रेस ने इसका ऐसा हाथ पकड़ा कि यह कांग्रेस का पर्याय बन गया। १९७७ से २००३ तक सात बार कांग्रेस की टिकट पर श्रीगंगानगर से विधानसभा का चुनाव लड़ा। तीन बार जीता चार बार हारा। एक बार तो राधेश्याम के सामने भैरों सिंह शेखावत तक को हारना पड़ा। उसके बाद राधेश्याम, राधेश्याम से राधेश्याम गंगानगर हो गए। २००३ में यह नेता जी ३६००० मतों से हार गए। तब इनको ३४१४० वोट मिले थे। इनको हराने वाला था बीजेपी का उम्मीदवार। इस बार कांग्रेस ने राधेश्याम को उम्मीदवार नही बनाया। बस उसके बाद तो नेता जी आपे से बहार हो गए,कांग्रेस नेताओं को बुरा भला कहा। बिरादरी की पंचायत बुलाई,लेकिन सभी ने नकार दिया। आज इस नेता जी ने दिल्ली में बीजेपी को ज्वाइन कर लिया। अब इनके श्रीगंगानगर से बीजेपी उम्मीदवार होने की उम्मीद है। इनके घर पर कई दशकों से इनकी शान का प्रतीक बना हुआ कांग्रेस के झंडे के स्थान पर बीजेपी का झंडा लगा दिया गया है। जब झंडा बदला जा रहा था तब लोग यह कह रहे थे कि झंडा डंडा सब बदल गया, तब नारदमुनि का कहना था कि जब आत्मा ही बदल गई तो झंडे डंडे की क्या बात। आत्मा के इस बदलाव ने सब के चेहरे के भाव बदल कर रख दिए। राजनीति तेरी जय हो,ऐसी राजनीति जिसमे नीति कहीं दिखाई नहीं देती।

श्रीगंगानगर में नेशनल कांफ्रेंस

भारत-पाक सीमा के निकट स्थित श्रीगंगानगर के एम डी कॉलेज में आगामी १२-१३ दिसम्बर को "भारतीय बैंकिंग का बदलता हुआ चेहरा" विषय पर नॅशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। इस में हिंदुस्तान के जाने माने लोग अपने पत्रों का वाचन करेंगे। दुनिया भर में जारी मंदी के इस दौर में इस कांफ्रेंस का बहुत महत्व माना जा रहा है।
यहाँ यह इसलिए लिखा जा रहा है क्योंकि एक तो यह उस कॉलेज में हो रही है जिसमे मैं पढता था। दूसरा इसके संयोजक हैं मेरे लिए सम्माननीय डॉ ओ पी गुप्ता। कोई भी जानकारी या सुझाव का आदान प्रदान उनसे इस नम्बर ०९४१४९४८९१३ पर किया जा सकता है।

झूठे हैं तेरे वादे

भोला मन नहीं समझ सका
तेरे चालाक इरादे
तूने तो अब आना नहीं
झूठें हैं तेरे वादे।
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तिल तिल मैं यहाँ जल रही
तूं लिख ले मेरे बैन
चिता को आग लगा जाना
मिल जाएगा चैन।
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कितने सावन बीत गए
मिला ना मन को चैन
बादल तो बरसे नहीं
बरसत है दो नैन।
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तेरे दर्शन की आस को
जिन्दा है ये लाश
इस से ज्यादा क्या कहूँ
समझ ले मेरी बात।

---गोविन्द गोयल

Tuesday 11 November 2008

तुम्हारी किताबों की किस्मत

मुझसे अच्छी है तुम्हारी
इन किताबों की किस्मत
जिन्हें तुम हर रोज़
अपने सीने से लगाती हो
मेरे बालों से कहीं अधिक
खुशनसीब है
तुम्हारी इन किताबों के पन्ने
जिन्हें तुम हर रोज़ बड़े
प्यार से सहलाती हो
मेरी रातों से भी हसीं हैं
तुम्हारी इन किताबों की रातें
जिन्हें तुम अपने पास सुलाती हो
इतनी खुशनसीबिया देखकर भी
तुम्हारी इन किताबों की
मेरी आँखे हर पल बार बार रोतीं हैं
क्योंकि हर साल तुम्हारे सीने से लगी
एक नई किताब होती है
वो पुरानी किताब पड़ी रहती है
एक तरफ़ आलमारी में 'गोविन्द" की तरह
इस उम्मीद के साथ कि
शायद एक फ़िर सीने से लगा लो
तुम इस पुरानी किताब को।




Monday 10 November 2008

प्रीत-विरह-फाल्गुन-सजनी

दरवाजे पर खड़ी खड़ी
सजनी करे विचार
फाल्गुन कैसे गुजरेगा
जो नहीं आए भरतार।
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फाल्गुन में मादक लगे
जो ठंडी चले बयार,
बाट जोहती सजनी के
मन में उमड़े प्यार।
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साजन का मुख देख लूँ
तो ठंडा हो उन्माद,
बरसों हो गए मिले हुए
रह रह आवे याद।
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प्रेम का ऐसा बाण लगा
रिस रिस आवे घाव,
साजन मेरे परदेशी
बिखर गए सब चाव।

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हार सिंगार छूट गए
मन में रही ना उमंग
दिल पर लगती चोट है
बंद करो ये चंग।
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परदेशी बन भूल गया
सौतन हो गई माया,
पता नहीं कब आयेंगें
जर जर हो गई काया।
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माया बिन ना काम चले
ना प्रीत बिना संसार,
जी करता है उड़ जाऊँ,
छोड़ के ये घर बार।
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बेदर्दी साजन मेरा
चिठ्ठी ना कोई तार,
एक संदेशा नहीं आया
कैसे निभेगा प्यार।
----गोविन्द गोयल

Saturday 8 November 2008

वंशवाद का बखेडा

---- चुटकी----

नेहरू,इंदिरा
राजीव, राहुल
फ़िर शायद बढेरा,
हिंदुस्तान में पता
नहीं कब तक रहेगा
वंशवाद का बखेडा।

---गोविन्द गोयल

लोकतंत्र में वंश वाद की आंधी

---चुटकी-----

नेहरू,इंदिरा
राजीव और
अब राहुल गाँधी,
लोकतंत्र में भी
खूब चल रही है
वंश वाद की आंधी।

---गोविन्द गोयल

Friday 7 November 2008

सास बहू को दी विदाई

---- चुटकी----

एक महिला ने
दूसरी से कहा
ये क्या हो गया हाय,
एकता कपूर ने
सास बहू को
बोल दिया बाय।
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पता नहीं किसने
सास बहू को
नजर लगाई है,
जो इसको बंद
करने की नौबत आई है।
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शायद "बा" का अमरत्व
ले बैठा इसको,
बा तो मरती नही
इसलिए ख़ुद ही खिसको।

----गोविन्द गोयल

Thursday 6 November 2008

यमराज को बनाया भाई

हिंदुस्तान की संस्कृति उसकी आन बान और शान है। दुनिया के किसी कौने में भला कोई सोच भी सकता है कि मौत के देवता यमराज को भी भाई बनाया जा सकता है। श्रीगंगानगर में ऐसा होता है हर साल,आज ही के दिन। महिलाएं सुबह ही नगर के शमशान घाट में आनी शुरू हो गईं। हर उमर की महिला,साथ में पूजा अर्चना और भेंट का सामान,आख़िर यमराज को भाई बनाना है। यमराज की बड़ी प्रतिमा, उसके पास ही एक बड़ी घड़ी बिना सुइयों के लगी हुई, जो यह बताती है की मौत का कोई समय नहीं होता। उन्होंने श्रद्धा पूर्वक यमराज की आराधना की उसके राखी बांधी, किसी ने कम्बल ओढाया किसी ने चद्दर। यमराज को भाई बनाने के बाद महिलाएं चित्रगुप्त के पास गईं। पूजा अर्चना करने वाली महिलाओं का कहना था कि यमराज को भाई बनाने से अकाल मौत नहीं होती। इसके साथ साथ मौत के समय इन्सान तकलीफ नही पाता। चित्रगुप्त की पूजा इसलिए की जाती है ताकि वह जन्मो के कर्मों का लेखा जोखा सही रखे। यमराज की प्रतिमा के सामने एक आदमी मारा हुआ पड़ा है,उसके गले में जंजीर है जो यमराज के हाथ में हैं। चित्रगुप्त की प्रतिमा के सामने एक यमदूत एक आत्मा को लेकर खड़ा है और चित्रगुप्त उसको अपनी बही में से उसके कर्मों का लेखा जोखा पढ़ कर सुना रहें हैं। सचमुच यह सब देखने में बहुत ही आनंददायक था। महिलाएं ग़लत कर रही थी या सही यह उनका विवेक। मगर जिस देश में नदियों को माता कहा जाता है वहां यह सब सम्भव है।

नेताओं की छंटनी

----चुटकी----

कट गया टिकट
खडें हैं बीच मंझधार,
नेताओं पर भी
पड़ रही है
छंटनी की मार।

----गोविन्द गोयल

गंगा की भी होगी वही गति

---- चुटकी----

गंगा को घोषित
किया रास्ट्रीय नदी,
हॉकी,चीता, मोर
जैसी हो जायेगी
अब इसकी गति।

--गोविन्द गोयल

निष्ठा केवल अपने स्वार्थ के लिए

श्रीगंगानगर में एक कांग्रेस नेता हैं राधेश्याम गंगानगर। इनको कांग्रेस का पर्याय कहा जाता था। गत सात विधानसभा चुनाव ने ये कांग्रेस के उम्मीदवार थे। बीजेपी के दिग्गज भैरों सिंह शेखावत को भी इनके सामने हार का मुहं देखना पड़ा। इस बार कांग्रेस ने इस बुजुर्ग को टिकट देना उचित न समझा। बस तो निष्ठा बदल गई,बगावत की आवाज बुलंद कर दी। जिनकी चौखट पर टिकट के लिए हाजिरी लगा रहे थे उन नेताओं को ही कोसना शुरू कर दिया। यहाँ तक कहा कि टिकट पैसे लेकर बांटी गई हैं। ऐलान कर दिया कि कांग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त करवा देंगें। अब इस नेता ने महापंचायत बुलाई है उसमे निर्णय होगा कि नेता जी को चुनाव लड़ना चाहिए या नही। राधेश्याम आज जो कुछ है वह कांग्रेस की ही बदोलत है जिसकी खिलाफत करने की वह शुरुआत कर रहा है। कांग्रेस ने जिस राज कुमार गौड़ को टिकट दी है वह बुरा आदमी नहीं है, साफ छवि का मिलनसार आदमी है। ३७ साल से राजनीति में है। सीधे सीधे किसी प्रकार का कोई आरोप नहीं है। लेकिन उसके पास कार्यकर्त्ता नहीं हैं। इतने लंबे राजनीतिक जीवन में गौड़ के साथ केवल तीन आदमी ही दिखे। ऐसे में वे क्या करेंगे कहना मुश्किल है। रही बात बीजेपी कि तो उसके पास इस से अच्छा मौका कोई हो नहीं सकता। जाति गत समीकरणों की बात करें तो उसके पास प्रहलाद टाक है। राजनीति में बिल्कुल फ्रेश चेहरा। इनके कुम्हार समाज को अभी तक बीजेपी कांग्रेस ने टिकट नहीं दी है। ओबीसी के इस इलाके में बहुत अधिक मतदाता हैं। कांग्रेस में बगावत के समय वे बीजेपी के लिए कोई चमत्कार करने सकते हैं। अन्य उम्मीदवार फिलहाल पीछे हुए हैं, उनकी टिकट मांगने की गति धीमी हो गई उत्साह भी नहीं रहा। जनता तो बस इंतजार ही करने सकती है।

Wednesday 5 November 2008

बात बेबात ठहाके लगाओ

---- चुटकी----

सब के सब अपने
नवजोत सिद्धू को
अपना आदर्श बनाओ,
बात हंसने की
हो या न हो
बस ठहाके लगाओ।

----गोविन्द गोयल

भात भरेगा मामा

---- चुटकी----

झोली फैलाकर
खड़े रहो
होगी ऐसी करामात,
खुशियाँ घर घर
बरसेंगीं,मामा[चन्दा]
ऐसा भरेगा भात।

----गोविन्द गोयल

बंद कर दो हंगामा

---- चुटकी-----

दुःख,दर्द ,तकलीफ
सब भूल जाओ
ना करो कोई हंगामा,
सब समस्याओं का
समाधान कर देगा
अपना चंदा मामा।

---गोविन्द गोयल

Tuesday 4 November 2008

क्यों दिखाती हो झूठे ख्वाब

---- चुटकी----

जो सालों से नहीं मिला
वह अब मिलेगा,
स्नेह करेगा
तुम्हे पुचकारेगा,
प्यार से पूछेगा
हमसे दिल की बात,
हे सखी,क्यों तंग करती हो
क्यों दिखाती हो झूठे ख्वाब,
कुछ और ना समझ सखी
नेता जी आयेंगें
क्योंकि सामने हैं चुनाव।

---गोविन्द गोयल

Monday 3 November 2008

कुत्ते को घुमाते हैं शान से

---- चुटकी----
बुजुर्ग माँ-बाप
के साथ चलते
हुए शरमाते हैं हम,
अपने कुत्ते को
सुबह शाम
घुमाते हैं हम।
------
अधिकारों के लिए
लगा देंगें
अपने घर में ही आग,
अपने कर्त्तव्यों को
मगर भूल जाते हैं हम।
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कश्मीर से कन्याकुमारी तक
खंड खंड हो रहा है देश
फ़िर भी अनेकता में एकता
के नारे लगाते हैं हम।
----
सबको पता है कि
बिल्कुल अकेले हैं हम,
हम, अपने आप को
फ़िर भी बतातें हैं हम।
----गोविन्द गोयल

Sunday 2 November 2008

काजल की कोठरी में भी झकाझक

हम बुद्धिजीवी हर वक्त यही शोर मचाते हैं हैं की हाय!हाय! राजनीति में साफ छवि और ईमानदार आदमी नही आते। लेकिन देखने लायक जो हैं उनकी क्या स्थिति इस राजनीति में है,उसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। श्रीगंगानगर जिले में है एक गाँव है २५ बी बी। वहां के गुरमीत सिंह कुन्नर पंच से लेकर लेकर विधायक तक रहे। लेकिन किसी के पास उनके खिलाफ कुछ कहने को नही है। कितने ही चुनाव लड़े मगर आज तक एक पैसे का भी चंदा उन्होंने नहीं लिया। किसी का काम करवाने के लिए उन्होंने अपने गाड़ी घोडे इस्तेमाल किए। राजस्थान में जब वे विधायक चुने गए तो उन्हें सबसे ईमानदार और साफ छवि के विधायक के रूप में जाना जाता था। कांग्रेस को समर्पित यह आदमी आज कांग्रेस की टिकट के लिए कांग्रेस के बड़े लीडर्स की चौखट पर हाजिरी लगाने को मजबूर है। जिस करनपुर विधानसभा से गुरमीत कुन्नर टिकट मांग रहा है वहां की हर दिवार पर लिखा हुआ है कि
गुरमीत सिंह कुन्नर जिताऊ और टिकाऊ नेता है किंतु यह कहानी कांग्रेस के लीडर्स को समझ नहीं आ रही। गत दिवस हजारों लोगों ने गुरमीत सिंह कुन्नर के यहाँ जाकर उनके प्रति समर्थन जताया, उनको अपना नेता और विधायक माना। ऐसी हालातों मेंकोई सोच सकता है कि ईमानदार और साफ छवि के लोग राजनीति में आयेंगें। पूरे इलाके में कोई भी एजेंसी सर्वे करे या करवाए, एक आदमी भी यह कहने वाला नहीं मिलेगा कि गुरमीत सिंह कुन्नर ने किसी को सताया है या अपनी पहुँच का नाजायज इस्तेमाल उसके खिलाफ किया। जब राजनीति का ये हाल है तो कोई क्या करेगा। यहाँ तो छल प्रपंच करने वालों का बोलबाला है। राजनीति को काजल की कोठरी कहना ग़लत नहीं है। जिसमे हर पल कालिख लगने की सम्भावना बनी रहती है। अगर ऐसे में कोई अपने आप को बेदाग रख जन जन के साथ है तो उसकी तारीफ की ही जानी चाहिए।
जागरूक ब्लोगर्स,इस पोस्ट को पढ़ने वाले बताएं कि आख़िर वह क्या करे? राजनीति से सन्यास लेकर घर बैठ जाए या फ़िर लडाई लड़े जनता के लिए जो उसको मानती है।

छठी का दूध याद आ गया

----- चुटकी-----

राज ठाकरे तो
एक दम से
पलटी खा गया ,
शायद उसको
छठी का दूध
याद आ गया।

----गोविन्द गोयल

Saturday 1 November 2008

दीपावली की सजावट प्रतियोगिता

श्रीगंगानगर में दिवाली पर बाज़ार में सजावट पतियोगिता का आयोजन किया गया। यह आयोजन पब्लिक पार्क दुकानदार यूनियन ने करवाई थी। दिवाली की रात को श्रीराम तलवार,विधायक ओ पी महेन्द्रा,व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश शर्मा,राकेश शर्मा, संजय कालड़ा और न्यूज़ चैनल की रिपोर्टर स्वाति अग्रवाल आदि के निर्णायक मंडल ने बाज़ार में दुकानों का अवलोकन कर विजेताओं को ईनाम दिए। उसी समय के दो चित्र ।


अंधेर नगरी चौपट राजा

---- चुटकी----

अंधेर नगरी
चौपट राजा,
हिंदुस्तान का तो
बज गया बाजा।
टके सेर भाजी
टके सेर खाजा,
लूटनी है तो
जल्दी से आजा।

---गोविन्द गोयल