Thursday 5 February 2009

मृत शरीर को दान किया

किसी ने कहा है " हट के दिया,हट के किया याद रहता है। हमारे हिंदुस्तान मृत शरीर के प्रति आदर मान का भाव है। डैड बॉडी चाहे किसी भी धर्म से सम्बन्ध रखने वाले इन्सान की हो उसका निरादर नही किया जाता। हम तो बॉर्डर पर रहतें है इसलिए जानते हैं कि बॉर्डर पर जब कोई पाक घुसपैठिया मारा जाता है तो उसकी डैड बॉडी का भी उसके धर्म के अनुरूप अन्तिम संस्कार किया जाता है। यह तो आम बात है। आज जिसके बारे में लिखा जा रहा है वह जरा हट के है। श्रीगंगानगर में एक परिवार में एक महिला की मौत हो गई। मौत ही एक सच्चाई है बाकी सब झूठ है। महिला के परिजनों ने डैड बॉडी का अन्तिम संस्कार नहीं करके उसको मैडिकल कॉलेज को दान कर दिया । मृत महिला के परिजनों ने शव की अन्तिम यात्रा निकली। अर्थी को मरघट तक लेकर गए । वहां उसके अन्तिम दर्शन करके डैड बॉडी को मेडिकल कॉलेज को दान में दे दिया गया। जिस देश में धर्म के प्रति अंध विश्वाश हो। उस देश में अपने परिजन की मृत देह का अन्तिम संस्कार करने की बजाय उसको किसी के हवाले कर देना अपने आप में जरा हट के है। हजारों साल पहले एक महात्मा दाधीच ने भी अपने शरीर को दान कर दिया था। "तन का बंधन दुनियादारी,रूह का मिलना प्यार,डाल झुके तो जीत तुम्हारी,उछल तोड़ना हार।

6 comments:

seema gupta said...

"its strange and daring too"

Regards

Anil Pusadkar said...

अब लोग करने लगे है शरीर दान्।छत्तीसगढ के विख्यात शिक्षाविद प्रोफ़ेसर रणवीर सिंह शास्त्री जो अविभाजित मध्य प्रदेश मे मंत्री भी रहे,ने भी अपना शरीर दान किया था।जीते समय तो शिक्षा दे्ते रहे मरने के बाद उनका शरीर भी छात्रो की शिक्षा के काम आए ये उनका उद्देश्य था।

Mired Mirage said...

बहुत अच्छा किया। यदि पूरा शरीर न भी दान किया जा सके तो कमसे कम अंग दान तो कर ही देना चाहिए।
घुघूती बासूती

KK Yadav said...

सुन्दर भाव -दधीची जी की परंपरा कायम है !! ___________________________________
मेरे ब्लॉग शब्द-शिखर पर आकार देखें- "श्रृंगार-कक्ष की दीवारों से आरम्भ हुआ डाक टिकट संग्रह का शौक."

vimi said...

it is great that the family was courageous to do this, it is done for a noble cause.

सीमा सचदेव said...

Namskaar ,
aaj aapki yahi post BANGALORE se publish hone vaale hindi news paper DAKSHIN BHAARAT me padhi . Aapko iski soochana deni chaahiye na ki aapke blog ki charcha DAKSHIN BHAARAT me hue hai . Jaan kar achcha laga ki log puraani prampraayon se hat kar ek saarthak soch apna rahe hai .